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मैंने दिल में ही रहने दिया

हसरतें जो दिल में थी,

मैंने उन्हें दिल में ही रहने दिया.

न कभी मैंने उससे कुछ कहा,

न कभी उसे कुछ समझने दिया.

 

चाहतें जो दिल में थी,

मैंने उन्हें दिल में ही रहने दिया.

पहनाकर लिबाज़ दोस्ती का,

हर बार अपनी चाहतों को,

पेश सामने उसके कर दिया.।


ख्वाइशें जो दिल में थी,

मैंने उन्हें दिल में ही रहने दिया.

जीत रहा था खवाबों में मैं बाज़ी सारी इश्क़ की,

लेकिन हकीकत ने मुझे आईना दिखा दिया.

 

थे जितने भी नापाक इरादे मेरे,

मैंने उन्हें दिल में ही रहने दिया,

हाल-ए-दिल मेरा अपनी ज़बान को कभी न उससे कहने दिया.

एकतरफ़ा ही सही इस इश्क़ पर हक़ पूरा मेरा है,

झूठा ही सही ये दिलासा मेरा,

इसी ने मेरे बिखरते दिल को हौसला दिया.

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पल भर

पल भर और सही,

अपना हाथ थोड़ी देर और थमने दो

एहसास मेरी रूह को

अबतक तुम्हारा हुआ नहीं.
पल भर और सही

मुझे तेरी इन सागर सी गहरी

आंखों में झांकने दो,

इनमे मुझे अपना दीदार अबतक हुआ नहीं.
पल भर और सही

अपने गालों पर तुम्हारी इन बिखरी जुल्फों को

थोड़ी देर और ठहरने दो,

तुम्हारी इस बेफिक्र सूरत को

अभीतक जी भरके मैंने देखा नहीं.
पल भर और सही

तू थोड़ा और ठहरजा, आखरी मुलाकात समझ कर ही सही

के मैंने कैद इस लम्हे को अपने दिल में करलूँ.

क्योंकि आने वाला वक़्त हमारा नहीं है

ख्याल.

मैं ख्यालों का शायर हूँ,

ख्यालों में जी कर लिखता हूँ.

ये हकीकत भी तो मेरी बड़ी चालक,

खुद को अलफाजों में बयान होने नहीं देती.

तुम वहां मैं यहाँ

मेरे अल्फ़ाज़ों  की गलती थी,

या तुम्हारे अंदाज-ए-गुफतगू की थी खता.

था वक़्त का कसूर इसमें,

या थी ये किस्मत की सजा,

किसे पता था जहान अपना ऐसा बदलेगा,

तुम बैठोगी होगी खामोश वहां,

मैं बैठा होंगा खामोश यहाँ.

 

पागल दिल

लाख दफा समझया इस पागल दिल को,

के नाजा गली में उसकी तू यूँ बेईज्जत होने.

जिन रास्तों की मंजिल नहीं,

उन रास्तों का सफर मुनासिफ नहीं.

बारिश की बूंदे

ये ठंडी हवाएं
ये बारिश की बूंदे

जब भी मुझतक आती हैं

कई पुरानी यादों को ये फिर से दिल मे जगती है
किसी दिल-ए-खास सी ये

आकर मेरे गालों को चूमती है

हम दोनों के इस मिलन पर

ये मद्धम हवाएं भी झूमती है
मैं भी सब कुछ भूल कर,

बाँहों को अपनी खोल कर

एहसास इनका कर लेता हूँ

इन बूंदों के बहाने ही सही

मैं फिर से इस खाली दिल में

चंद यादों को कैद कर लेता हूँ.

मैं भी कई कही अनकही बाते इसको बताता हूँ

बस इसी उम्मीद में की

एक दिन तो ये उसतक इन बातो को लेजाएगी

क्या है हाल-ए-दिल मेरा

ये उसको भी बताएगी
पर ये भी बड़ी चालाक हैं

पल भर में गायब हो जाती है

इंद्रधनुष की आड़ में

मुझपर ये मुस्कुराती है

जाते-जाते दिल में मेरे

ये मीठा दर्द ये दे जाती है
ये ठंडी हवाएं 

ये बारिश की बूंदे

मुझको बड़ा सताती हैं