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वो ऐसी नहीं है

जली थी लौ इश्क़ की मेरे दिल मे
कसूर इसमें उसका नहीं है
वो मेरे पास मैं दूर हूँ उससे ये किस्मत है मेरी
बेकदर है वो माना पर बेवफा नहीं है

होगी वजहें उसकी भी कईं
नज़रअंदाजी उसकी ये यूँही नहीं है
सुना है हमनवा हैं उसके बहुत
मेरी हमनवाई की शायद उसे जरूरत नहीं है

भूल तो जाता मैं कबका उसे
पर ज़हन से दूर मेरे वो कभी जाती ही नहीं है
फिर भी बहका देता हूँ मैं ये कहकर अपने नादान दिल को
के चाहता है वो मेरी जरूरत नहीं है

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