Monthly Archives: July 2018

मुझे अब प्यार नहीं होता

मुझे अब प्यार नहीं होता
लुटा हूँ इश्क़ की गलियों में इस कदर
के अब किसी दिल-ए-अज़ीज़ से इज़हार नहीं होता

टूटे हैं ख्वाब मेरे कई
के अब ख्वाबों का मुझे ऐतबार (Trust) नहीं होता
बिन सोचे ही चल देता हूँ उन राहों पर मैं
जिनपर साथ चलने को कोई हमदम यार नहीं होता

निकलते हैं ज़ुबान से आतिश-ए-अल्फ़ाज़(Words with fire) कई
के अपनी जुबान पर मुझे अब इख्तियार (Control) नहीं होता
सजती हैं महफ़िल यारों की अब भी
पर हर महफ़िल में मेरा नाम शुमार नहीं होता

नहीं रह गई है अब कोई उमंग बाकी
अब ये दिल पहले सा किसी के लिए बेकरार नहीं होता
पूछता है जहान मुझसे मेरे इस गम की वजह
कोई जाकर कह दो सबको कि मुझे अब प्यार नहीं होता

Advertisements