मैंने जीना सीख लिया

जब गम का न कोई एहसास हुआ
जब बेबसी में न कोई पास हुआ
जब ये दर्द है मेरा यार हुआ
जब किसी पर न ऐतबार हुआ
उस पल, हां उस पल मैंने जीना सीख लिया

जब शामों-सुबह न किसी का इंतजार हुआ
जब फिर न ये दिल बेकरार हुआ
जब चाहतों पर मेरा इख्तियार हुआ
जब साथ कोई न हमदम यार हुआ
उस पल, हां उस पल मैंने जीना सीख लिया

जब इस जहाँ से मैं अनजान हुआ
जब फिर न बीती यादों का कत्लेआम हुआ
जब मुझे न फिक्र-ए-अंजाम हुआ
जब ज़िंदगी को समझना ही मेरा काम हुआ
उस पल, हां उस पल मैंने जीना सीख लिया

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