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कोई गल नी दसदा

असां कित्थे जावां कोई गल नी दसदा
Where should I go nobody tells me
केड़ा पीर मनावां कोई गल नी दसदा
Which god should I please nobody tells me
मंदर ते मसीती कित दा रुख कराँ
Temple or mosque where should go next
केड़े मुरशद दे दर विच मैं सजदा पावँ नी कोई गल नी दसदा
In front of which God I should bow down nobody tells me
गम्मा विच कटदे साडे रैन-सवेरे
My night and days are going with sadness
अखां चो बरसे हंजु भतेरे
My eyes having so much tears
वे कित्थे बसदे हैं ख्यालां वाले सुख दे डेरे कोई गल नी दसदा
Where are the Happy places of my thoughts located nobody tells me
हुन कदतक मैंनू एह दर्द है सहना
How long I have to bear this pain
हुन कदतक भिजते रहने एह नैना
How long my eyes have to be wet
हुन क्यों दिल साडा ये चैन नी पावां
Why didn’t my heart find the final peace
हुन ओ रब्बा मैं कित्थे जावां कोई गल नी दसदा
Oh god where should I go nobody tells me

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क्यों

क्यों कटती नहीं ये गम-ए-शाम
क्यों यादें पुरानी अब भी जिंदा है
क्यों मिलता नहीं है चैन मुझको
क्यों अब भी कफ़स (पिंजरा) में कैद मेरी आज़ादी का परिंदा है

क्यों भूला नहीं जाता वो मंजर वो वक़्त
क्यों ज़ख्म पुराने ये दिल अब भी कुरेदता है
क्यों होता नहीं सवेरा इस अंधियारे के बाद
क्यों दिखता नहीं मुझको कि कहां अपना डेरा है

क्यों कटती नहीं ये गम-ए-शाम
क्यों आज भी ये दिल अकेला है
क्यों ज़िंदा होकर भी जिंदा नहीं हूं मैं
क्यों खुदसे मैंने ये संजीदा खेल खेला है

मैंने जीना सीख लिया

जब गम का न कोई एहसास हुआ
जब बेबसी में न कोई पास हुआ
जब ये दर्द है मेरा यार हुआ
जब किसी पर न ऐतबार हुआ
उस पल, हां उस पल मैंने जीना सीख लिया

जब शामों-सुबह न किसी का इंतजार हुआ
जब फिर न ये दिल बेकरार हुआ
जब चाहतों पर मेरा इख्तियार हुआ
जब साथ कोई न हमदम यार हुआ
उस पल, हां उस पल मैंने जीना सीख लिया

जब इस जहाँ से मैं अनजान हुआ
जब फिर न बीती यादों का कत्लेआम हुआ
जब मुझे न फिक्र-ए-अंजाम हुआ
जब ज़िंदगी को समझना ही मेरा काम हुआ
उस पल, हां उस पल मैंने जीना सीख लिया

मुझे अब प्यार नहीं होता

मुझे अब प्यार नहीं होता
लुटा हूँ इश्क़ की गलियों में इस कदर
के अब किसी दिल-ए-अज़ीज़ से इज़हार नहीं होता

टूटे हैं ख्वाब मेरे कई
के अब ख्वाबों का मुझे ऐतबार (Trust) नहीं होता
बिन सोचे ही चल देता हूँ उन राहों पर मैं
जिनपर साथ चलने को कोई हमदम यार नहीं होता

निकलते हैं ज़ुबान से आतिश-ए-अल्फ़ाज़(Words with fire) कई
के अपनी जुबान पर मुझे अब इख्तियार (Control) नहीं होता
सजती हैं महफ़िल यारों की अब भी
पर हर महफ़िल में मेरा नाम शुमार नहीं होता

नहीं रह गई है अब कोई उमंग बाकी
अब ये दिल पहले सा किसी के लिए बेकरार नहीं होता
पूछता है जहान मुझसे मेरे इस गम की वजह
कोई जाकर कह दो सबको कि मुझे अब प्यार नहीं होता

कभी तो…

कुछ यूं गर किस्मत हो जाता कभी तो
मैं फकत तेरा हो जाता कभी तो
मैं तेरे पेशानी (माथा) पर हर पल बिखरती हुई, उलझी जुल्फों को सुलझाता
और तेरी बाहों में बैठे हुए शायद मैं हाल-ए-दिल कह पाता कभी तो

गर मुझे मौका मिल पाता कभी तो
मैं दिल के हर सफे (कागज़) पर नाम तेरा लिख पाता कभी तो
जिसे सुनकर तेरी आँखों में भी अश्क भर आते
अपनी लिखी वो अनसुनी ग़ज़ल मैं तुझे सुनता कभी तो

गर खुदा-ए-रहमत ऐसा हो जाता कभी तो
मेरा ये ख़्वाब सच हो जाता कभी तो
मैं उम्र बिता देता खिदमत में उसकी
गर मेरा हमनवा मेरा हमसफर बन जाता कभी तो

सिगरेट

सिगरेट सी बन गई हो तुम
हर कश में मेरी जान लेती जाती हो
दूर रहना तुमसे मुनासिब नहीं लगता
पास रहने पर मौत की वजह बन जाती हो तुम

हर पल तुम्हे याद करना शौक नहीं है मेरा
अक्सर ज़हन में रहते हुए आदत मेरी बन जाती हो तुम
गर फकत मैं कभी भूलना चाहूँ भी जो तुम्हे
तो तनहाई के आलम में याद बनकर आ जाती हो तुम

मैं माचिस सा जलता हूँ हर बार
शमाएँ तुम्हारी जलाने के लिए
और किसी जलती सिगरेट की तरह किसी और के होंठों पर चली जाती हो तुम
गर कभी मैं तुम तक आने की कोशिश भी अगर करूं तो
बनकर धुंआ सिगरेट का पल भर उड़ जाती हो तुम

कई हर्फ़ ढूंढता हूँ मैं

कई हर्फ़ (Words) ढूंढे है दिल मेरा

हर्फ़ जो दिल-ए-तसल्ली दें
हर्फ़ जो सारी बातें कहें

हर्फ़ जो अल्फ़ाज़ बने
हर्फ़ जो आवाज़ बने

कई हर्फ़ ढूंढे है दिल मेरा

हर्फ़ जो खामोशियाँ कहें
हर्फ़ जो आंसू बनकर बाहें

हर्फ़ जो ना लाचार हों
हर्फ़ जो दिल से निकलने को बेकरार हों

कई हर्फ़ ढूंढे है दिल मेरा

हर्फ़ जो शायरी बने
हर्फ़ जो दिल दुखी कहें

हर्फ़ जो इश्क़ का कलमा पढ़ें
हर्फ़ जो आके तुझसे जुड़ें

कई हर्फ़ ढूंढे है दिल मेरा

हर्फ़ जो तुमको बयां करें
हर्फ़ जो तुमपर आके मरें

हर्फ़ जो बात दिलों की जानते हों
हर्फ़ जो तुम्हें पहचानते हों

हर्फ़ जो कह दें हाल-ए-दिल की बात जो ज़ुबाँ कभी कह पाई नहीं
हर्फ़ जो काबू में मेरे कभी आए ही नहीं

कुछ ऐसे ही हर्फ़ ढूंढता हूं मैं