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बारिश की बूंदें

मेरी खिड़की पर पड़ी ये बारिश की बूंदें

कहती है मुझसे ढेरों बातें

जो सिर्फ मुझको ही मालूम हैं
इन बातों को न कोई समझ सकता है

न कोई जान सकता है

पर आज कल नजाने क्यों

ये मुझसे ही महरूम हैं
शायद मेरी खामोशी से ये भी नाराज हैं

शायद मेरे हाल से ये अभी तक अनजान हैं
ये जो चुप्पी मैंने साधी हुई है

शायद यही वजह है जो ये भी अब

सिसक सिसक कर जाने लगी हैं

मेरी हर फरियाद को ये बिन सुने ही ठुकराने लगी हैं
मैं कहता इनसे राह जाता हूँ के

चंद लम्हे मुझ संग रुकने की ये वजह कोई ढूंढे

पर पल भर में हवा हो जाती हैं

मेरी खिड़की पर पड़ी ये बारिश की बूंदें

ख्याल.

मैं ख्यालों का शायर हूँ,

ख्यालों में जी कर लिखता हूँ.

ये हकीकत भी तो मेरी बड़ी चालक,

खुद को अलफाजों में बयान होने नहीं देती.

पागल दिल

लाख दफा समझया इस पागल दिल को,

के नाजा गली में उसकी तू यूँ बेईज्जत होने.

जिन रास्तों की मंजिल नहीं,

उन रास्तों का सफर मुनासिफ नहीं.

मैं लिखना तबसे भूल चुका हूँ

दिल की बोली ही मेरी लिखाई थी,

मैं बेफिकरा सा शायर था.

नजाने कब नजरे मिली

कब प्यार हुआ

मैं लिखना तबसे भूल गया हूँ.
अब न इश्क़ रहा है अल्फ़ाज़ों में

सब सिमट गया है जज़बातों में

चैन नहीं रहता है दिन में

नींद नहीं है रातों में


चेहरा उसका दिखने लगा हैं

जब भी आंखें मूँदता हूँ.

अपनी लिखी हर बात में अब तो

मैं ज़िक्र उसी का ढूंढता हूँ.

जबसे नजरे मिली,

जबसे प्यार हुआ,

मैं लिखना तबसे भूल चुका हूँ.
अब कलम हाथ से छोड़ चुका हूँ

राह उसतक मोड़ चुका हूँ

होश नहीं रहता है खुदका

खयालों में उसके मैं खो चुका हूँ.
सच है वो या है कलपना मेरी
ये बात समझ मे आती नहीं है
नजाने कैसे ख़यालात ऐसे मैं मन में अपने बो चुका हूँ.

जबसे नजारे मिली,

जबसे प्यार हुआ है,

मैं लिखना तबसे भूल गया हूँ